आधार की संवैधानिकता: उच्चतम न्यायालय के निर्णय के आलोक में

दिनांक: September 27, 2018

aadhar supreme court pan card

देश की सर्वोच्च अदालत ने आधार पर फैसला सुनाते हुए इसे संवैधानिक रूप से वैध तो माना, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि इसे हर किसी से शेयर करना जरूरी नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आधार को लेकर तमाम अनिश्चितताएं दूर हो गई हैं। ऐसे में अब आप टेलिकॉम कंपनियों, बैंकों, म्यूचुअल फंडों और इंश्योरेंस कंपनियों के रेकॉर्ड में दर्ज अपनी सूचनाओं को डिलीट करने को कह सकते हैं। पहले कानूनी स्पष्टता न होने के कारण इन संस्थानों ने बायॉमीट्रिक और दूसरी डीटेल्स मांगी थी।

आधार की संवैधानिक वैधता और इसे लागू करने वाले वर्ष 2016 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर साढ़े चार महीने बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। यह वर्ष 1973 में केशवनंद भारती के ऐतिहासिक मुकदमे के बाद इसे सुनवाई के हिसाब से दूसरा सबसे लंबा मुकदमा माना गया है।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कई मायनों में बेहद अहम है, क्योंकि अब तक देश में 1.21 अरब लोग आधार बनवा चुके हैं और बैंक खातों में सीधे सब्सिडी से लेकर तमाम अन्य तरह की लाभ योजनाओं को लागू करने में इसे बेहद अहमियत दी गई है।

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आधार ने गरीबों को दी पहचान

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि आधार नामांकन के लिए यूआइडीएआई द्वारा नागरिकों के न्यूनतम जनसांख्यिकीय (जनसंख्या संबंधी) और बॉयोमीट्रिक डेटा एकत्र किए जाते हैं। किसी व्यक्ति को दिया गया आधार संख्या अनन्य है और किसी अन्य व्यक्ति के पास नहीं जा सकता।'

जस्टिस एके सिकरी ने कहा, 'आधार समाज के हाशिए वाले वर्ग (गरीबों) को अधिकार देता है और उन्हें एक पहचान देता है, आधार अन्य आईडी प्रमाणों से भी अलग है क्योंकि इसे डुप्लीकेट नहीं किया जा सकता है। डेटा सुरक्षा को लेकर जस्टिस सिकरी ने केंद्र से कहा कि जितनी जल्दी हो सके मजबूत डेटा संरक्षण कानून लागू करें।

आधार सुरक्षा के उल्लंघन के आरोपों पर केंद्र ने कहा कि डेटा सुरक्षित है और इसका उल्लंघन नहीं किया जा सकता। केंद्र ने यह भी तर्क दिया कि आधार समाज के कमजोर और हाशिए वाले वर्गों के अधिकारों की रक्षा करता है और उन्हें बिचौलियों के बिना लाभ मिलते हैं और आधार ने सरकार के राजकोष में 55000 करोड़ रुपये बचाए हैं।

फैसला पढ़ते वक्त सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार से बड़े वर्ग को फायदा। साथ ही प्राइवेट पार्टी भी डेटा नहीं देख सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार के पीछे तार्किक सोच, साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऑथेंटिकेशन डाटा सिर्फ 6 महीने तक ही रखा जा सकता है। कम से कम डेटा होना चाहिए। आधार की अनिवार्यता पर फैसला पढ़ते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, बायोमीट्रिक डेटा की नकल नहीं की जा सकती।

इससे पहले आधार को लेकर कोर्ट में सरकार का पक्ष रखने वाले महाधिवक्ता मुकुल रोहतगी का कहना है कि इस फैसले का असर बहुत दूर तक होगा, क्योंकि आधार बहुत-सी सब्सिडी से जुड़ा है। यह लूट और बरबादी को रोकने में भी कारगर है, जो होती रही हैं... मुझे उम्मीद है कि फैसला आधार के हक में आएगा। डेटा की सुरक्षा बेहद अहम है और सरकार यह स्पष्ट कर चुकी है कि वह डेटा की सुरक्षा करेगी। इस सिलसिले में कानून भी लाया जा रहा है।"

न्यायमूर्ति चन्द्रचूड़ का मत :-(मुख्य परीक्षा के नजरिये से )

न्यायमूर्ति चन्द्रचूड़ ने अपना फैसला पढ़ते हुए कहा कि उनके विचार न्यायमूर्ति सीकरी द्वारा पढ़े गये फैसले से कुछ अलग हैं. उन्होंने कहा कि आधार कानून को लोकसभा में धन विधेयक के रूप में पारित नहीं किया जाना चाहिए था. संविधान का अनुच्छेद 110 में धन विधेयक के लिए विशेष मानदंड हैं. आधार कानून उससे अलग था. न्यायमूर्ति चन्द्रचूड़ ने कहा कि धन विधेयक के रूप में आधार कानून को पारित करना संविधान के साथ धोखाधड़ी के समान है. अनुच्छेद 110 का उल्लंघन करने के मामले में आधार कानून को खारिज किया जाना चाहिए. इसमें राज्यसभा को दरकिनार नहीं किया जाना चाहिए था.
कानून को पारित कराने के लिए राज्यसभा को दरकिनार करना एक प्रकार का छल है. उन्होंने कहा कि आधार कार्यक्रम सूचना की निजता, स्वनिर्णय और डेटा सुरक्षा का उल्लंघन करता है. यूआईडीएआई ने स्वीकार किया है कि वह महत्वपूर्ण सूचनाओं को एकत्र और जमा करता है औ यह निजता के अधिकार का उल्लंघन है. इन आंकड़ों का व्यक्ति की सहमति के बगैर कोई तीसरा पक्ष या निजी कंपनियां दुरूपयोग कर सकती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि आधार नहीं होने तक सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ नहीं देना नागरिकों के मूल अधिकारों का उल्लंघन है.